🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 447

The Book of Ayodhyā · Entry 447 of 664 · type: चौपाई

सुनु सुरेस उपदेसु हमारा। रामहि सेवकु परम पिआरा।। मानत सुखु सेवक सेवकाई। सेवक बैर बैरु अधिकाई।। जद्यपि सम नहिं राग न रोषू। गहहिं न पाप पूनु गुन दोषू।। करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा।। तदपि करहिं सम बिषम बिहारा। भगत अभगत हृदय अनुसारा।। अगुन अलेप अमान एकरस। रामु सगुन भए भगत पेम बस।। राम सदा सेवक रुचि राखी। बेद पुरान साधु सुर साखी।। अस जियँ जानि तजहु कुटिलाई। करहु भरत पद प्रीति सुहाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 447 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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