🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 445

The Book of Ayodhyā · Entry 445 of 664 · type: चौपाई

बचन सुनत सुरगुरु मुसकाने। सहसनयन बिनु लोचन जाने।। मायापति सेवक सन माया। करइ त उलटि परइ सुरराया।। तब किछु कीन्ह राम रुख जानी। अब कुचालि करि होइहि हानी।। सुनु सुरेस रघुनाथ सुभाऊ। निज अपराध रिसाहिं न काऊ।। जो अपराधु भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई।। लोकहुँ बेद बिदित इतिहासा। यह महिमा जानहिं दुरबासा।। भरत सरिस को राम सनेही। जगु जप राम रामु जप जेही।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 445 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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