🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 443

The Book of Ayodhyā · Entry 443 of 664 · type: चौपाई

जड़ चेतन मग जीव घनेरे। जे चितए प्रभु जिन्ह प्रभु हेरे।। ते सब भए परम पद जोगू। भरत दरस मेटा भव रोगू।। यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं। सुमिरत जिनहि रामु मन माहीं।। बारक राम कहत जग जेऊ। होत तरन तारन नर तेऊ।। भरतु राम प्रिय पुनि लघु भ्राता। कस न होइ मगु मंगलदाता।। सिद्ध साधु मुनिबर अस कहहीं। भरतहि निरखि हरषु हियँ लहहीं।। देखि प्रभाउ सुरेसहि सोचू। जगु भल भलेहि पोच कहुँ पोचू।। गुर सन कहेउ करिअ प्रभु सोई। रामहि भरतहि भेंट न होई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 443 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷