🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 439

The Book of Ayodhyā · Entry 439 of 664 · type: चौपाई

मुनि प्रभाउ जब भरत बिलोका। सब लघु लगे लोकपति लोका।। सुख समाजु नहिं जाइ बखानी। देखत बिरति बिसारहीं ग्यानी।। आसन सयन सुबसन बिताना। बन बाटिका बिहग मृग नाना।। सुरभि फूल फल अमिअ समाना। बिमल जलासय बिबिध बिधाना। असन पान सुच अमिअ अमी से। देखि लोग सकुचात जमी से।। सुर सुरभी सुरतरु सबही कें। लखि अभिलाषु सुरेस सची कें।। रितु बसंत बह त्रिबिध बयारी। सब कहँ सुलभ पदारथ चारी।। स्त्रक चंदन बनितादिक भोगा। देखि हरष बिसमय बस लोगा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 439 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷