🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 427

The Book of Ayodhyā · Entry 427 of 664 · type: चौपाई

नव बिधु बिमल तात जसु तोरा। रघुबर किंकर कुमुद चकोरा।। उदित सदा अँथइहि कबहूँ ना। घटिहि न जग नभ दिन दिन दूना।। कोक तिलोक प्रीति अति करिही। प्रभु प्रताप रबि छबिहि न हरिही।। निसि दिन सुखद सदा सब काहू। ग्रसिहि न कैकइ करतबु राहू।। पूरन राम सुपेम पियूषा। गुर अवमान दोष नहिं दूषा।। राम भगत अब अमिअँ अघाहूँ। कीन्हेहु सुलभ सुधा बसुधाहूँ।। भूप भगीरथ सुरसरि आनी। सुमिरत सकल सुंमगल खानी।। दसरथ गुन गन बरनि न जाहीं। अधिकु कहा जेहि सम जग नाहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 427 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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