🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 421

The Book of Ayodhyā · Entry 421 of 664 · type: चौपाई

प्रमुदित तीरथराज निवासी। बैखानस बटु गृही उदासी।। कहहिं परसपर मिलि दस पाँचा। भरत सनेह सीलु सुचि साँचा।। सुनत राम गुन ग्राम सुहाए। भरद्वाज मुनिबर पहिं आए।। दंड प्रनामु करत मुनि देखे। मूरतिमंत भाग्य निज लेखे।। धाइ उठाइ लाइ उर लीन्हे। दीन्हि असीस कृतारथ कीन्हे।। आसनु दीन्ह नाइ सिरु बैठे। चहत सकुच गृहँ जनु भजि पैठे।। मुनि पूँछब कछु यह बड़ सोचू। बोले रिषि लखि सीलु सँकोचू।। सुनहु भरत हम सब सुधि पाई। बिधि करतब पर किछु न बसाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 421 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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