🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 419

The Book of Ayodhyā · Entry 419 of 664 · type: चौपाई

जानहुँ रामु कुटिल करि मोही। लोग कहउ गुर साहिब द्रोही।। सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें।। जलदु जनम भरि सुरति बिसारउ। जाचत जलु पबि पाहन डारउ।। चातकु रटनि घटें घटि जाई। बढ़े प्रेमु सब भाँति भलाई।। कनकहिं बान चढ़इ जिमि दाहें। तिमि प्रियतम पद नेम निबाहें।। भरत बचन सुनि माझ त्रिबेनी। भइ मृदु बानि सुमंगल देनी।। तात भरत तुम्ह सब बिधि साधू। राम चरन अनुराग अगाधू।। बाद गलानि करहु मन माहीं। तुम्ह सम रामहि कोउ प्रिय नाहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 419 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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