🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 413

The Book of Ayodhyā · Entry 413 of 664 · type: चौपाई

सखा बचन सुनि उर धरि धीरा। बास चले सुमिरत रघुबीरा।। यह सुधि पाइ नगर नर नारी। चले बिलोकन आरत भारी।। परदखिना करि करहिं प्रनामा। देहिं कैकइहि खोरि निकामा।। भरी भरि बारि बिलोचन लेंहीं। बाम बिधाताहि दूषन देहीं।। एक सराहहिं भरत सनेहू। कोउ कह नृपति निबाहेउ नेहू।। निंदहिं आपु सराहि निषादहि। को कहि सकइ बिमोह बिषादहि।। एहि बिधि राति लोगु सबु जागा। भा भिनुसार गुदारा लागा।। गुरहि सुनावँ चढ़ाइ सुहाईं। नईं नाव सब मातु चढ़ाईं।। दंड चारि महँ भा सबु पारा। उतरि भरत तब सबहि सँभारा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 413 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷