🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 406

The Book of Ayodhyā · Entry 406 of 664 · type: चौपाई

कुस साँथरीनिहारि सुहाई। कीन्ह प्रनामु प्रदच्छिन जाई।। चरन रेख रज आँखिन्ह लाई। बनइ न कहत प्रीति अधिकाई।। कनक बिंदु दुइ चारिक देखे। राखे सीस सीय सम लेखे।। सजल बिलोचन हृदयँ गलानी। कहत सखा सन बचन सुबानी।। श्रीहत सीय बिरहँ दुतिहीना। जथा अवध नर नारि बिलीना।। पिता जनक देउँ पटतर केही। करतल भोगु जोगु जग जेही।। ससुर भानुकुल भानु भुआलू। जेहि सिहात अमरावतिपालू।। प्राननाथु रघुनाथ गोसाई। जो बड़ होत सो राम बड़ाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 406 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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