🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 400

The Book of Ayodhyā · Entry 400 of 664 · type: चौपाई

कपटी कायर कुमति कुजाती। लोक बेद बाहेर सब भाँती।। राम कीन्ह आपन जबही तें। भयउँ भुवन भूषन तबही तें।। देखि प्रीति सुनि बिनय सुहाई। मिलेउ बहोरि भरत लघु भाई।। कहि निषाद निज नाम सुबानीं। सादर सकल जोहारीं रानीं।। जानि लखन सम देहिं असीसा। जिअहु सुखी सय लाख बरीसा।। निरखि निषादु नगर नर नारी। भए सुखी जनु लखनु निहारी।। कहहिं लहेउ एहिं जीवन लाहू। भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू।। सुनि निषादु निज भाग बड़ाई। प्रमुदित मन लइ चलेउ लेवाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 400 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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