🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 386

The Book of Ayodhyā · Entry 386 of 664 · type: चौपाई

सई तीर बसि चले बिहाने। सृंगबेरपुर सब निअराने।। समाचार सब सुने निषादा। हृदयँ बिचार करइ सबिषादा।। कारन कवन भरतु बन जाहीं। है कछु कपट भाउ मन माहीं।। जौं पै जियँ न होति कुटिलाई। तौ कत लीन्ह संग कटकाई।। जानहिं सानुज रामहि मारी। करउँ अकंटक राजु सुखारी।। भरत न राजनीति उर आनी। तब कलंकु अब जीवन हानी।। सकल सुरासुर जुरहिं जुझारा। रामहि समर न जीतनिहारा।। का आचरजु भरतु अस करहीं। नहिं बिष बेलि अमिअ फल फरहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 386 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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