🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 384

The Book of Ayodhyā · Entry 384 of 664 · type: चौपाई

राम दरस बस सब नर नारी। जनु करि करिनि चले तकि बारी।। बन सिय रामु समुझि मन माहीं। सानुज भरत पयादेहिं जाहीं।। देखि सनेहु लोग अनुरागे। उतरि चले हय गय रथ त्यागे।। जाइ समीप राखि निज डोली। राम मातु मृदु बानी बोली।। तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी।। तुम्हरें चलत चलिहि सबु लोगू। सकल सोक कृस नहिं मग जोगू।। सिर धरि बचन चरन सिरु नाई। रथ चढ़ि चलत भए दोउ भाई।। तमसा प्रथम दिवस करि बासू। दूसर गोमति तीर निवासू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 384 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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