🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 378

The Book of Ayodhyā · Entry 378 of 664 · type: चौपाई

भा सब कें मन मोदु न थोरा। जनु घन धुनि सुनि चातक मोरा।। चलत प्रात लखि निरनउ नीके। भरतु प्रानप्रिय भे सबही के।। मुनिहि बंदि भरतहि सिरु नाई। चले सकल घर बिदा कराई।। धन्य भरत जीवनु जग माहीं। सीलु सनेहु सराहत जाहीं।। कहहि परसपर भा बड़ काजू। सकल चलै कर साजहिं साजू।। जेहि राखहिं रहु घर रखवारी। सो जानइ जनु गरदनि मारी।। कोउ कह रहन कहिअ नहिं काहू। को न चहइ जग जीवन लाहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 378 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷