🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 374

The Book of Ayodhyā · Entry 374 of 664 · type: चौपाई

आन उपाउ मोहि नहि सूझा। को जिय कै रघुबर बिनु बूझा।। एकहिं आँक इहइ मन माहीं। प्रातकाल चलिहउँ प्रभु पाहीं।। जद्यपि मैं अनभल अपराधी। भै मोहि कारन सकल उपाधी।। तदपि सरन सनमुख मोहि देखी। छमि सब करिहहिं कृपा बिसेषी।। सील सकुच सुठि सरल सुभाऊ। कृपा सनेह सदन रघुराऊ।। अरिहुक अनभल कीन्ह न रामा। मैं सिसु सेवक जद्यपि बामा।। तुम्ह पै पाँच मोर भल मानी। आयसु आसिष देहु सुबानी।। जेहिं सुनि बिनय मोहि जनु जानी। आवहिं बहुरि रामु रजधानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 374 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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