🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 366

The Book of Ayodhyā · Entry 366 of 664 · type: चौपाई

कहउँ साँचु सब सुनि पतिआहू। चाहिअ धरमसील नरनाहू।। मोहि राजु हठि देइहहु जबहीं। रसा रसातल जाइहि तबहीं।। मोहि समान को पाप निवासू। जेहि लगि सीय राम बनबासू।। रायँ राम कहुँ काननु दीन्हा। बिछुरत गमनु अमरपुर कीन्हा।। मैं सठु सब अनरथ कर हेतू। बैठ बात सब सुनउँ सचेतू।। बिनु रघुबीर बिलोकि अबासू। रहे प्रान सहि जग उपहासू।। राम पुनीत बिषय रस रूखे। लोलुप भूमि भोग के भूखे।। कहँ लगि कहौं हृदय कठिनाई। निदरि कुलिसु जेहिं लही बड़ाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 366 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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