🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 364

The Book of Ayodhyā · Entry 364 of 664 · type: चौपाई

हित हमार सियपति सेवकाई। सो हरि लीन्ह मातु कुटिलाई।। मैं अनुमानि दीख मन माहीं। आन उपायँ मोर हित नाहीं।। सोक समाजु राजु केहि लेखें। लखन राम सिय बिनु पद देखें।। बादि बसन बिनु भूषन भारू। बादि बिरति बिनु ब्रह्म बिचारू।। सरुज सरीर बादि बहु भोगा। बिनु हरिभगति जायँ जप जोगा।। जायँ जीव बिनु देह सुहाई। बादि मोर सबु बिनु रघुराई।। जाउँ राम पहिं आयसु देहू। एकहिं आँक मोर हित एहू।। मोहि नृप करि भल आपन चहहू। सोउ सनेह जड़ता बस कहहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 364 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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