🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 357

The Book of Ayodhyā · Entry 357 of 664 · type: चौपाई

अवसि नरेस बचन फुर करहू। पालहु प्रजा सोकु परिहरहू।। सुरपुर नृप पाइहि परितोषू। तुम्ह कहुँ सुकृत सुजसु नहिं दोषू।। बेद बिदित संमत सबही का। जेहि पितु देइ सो पावइ टीका।। करहु राजु परिहरहु गलानी। मानहु मोर बचन हित जानी।। सुनि सुखु लहब राम बैदेहीं। अनुचित कहब न पंडित केहीं।। कौसल्यादि सकल महतारीं। तेउ प्रजा सुख होहिं सुखारीं।। परम तुम्हार राम कर जानिहि। सो सब बिधि तुम्ह सन भल मानिहि।। सौंपेहु राजु राम कै आएँ। सेवा करेहु सनेह सुहाएँ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 357 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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