🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 353

The Book of Ayodhyā · Entry 353 of 664 · type: चौपाई

बैखानस सोइ सोचै जोगु। तपु बिहाइ जेहि भावइ भोगू।। सोचिअ पिसुन अकारन क्रोधी। जननि जनक गुर बंधु बिरोधी।। सब बिधि सोचिअ पर अपकारी। निज तनु पोषक निरदय भारी।। सोचनीय सबहि बिधि सोई। जो न छाड़ि छलु हरि जन होई।। सोचनीय नहिं कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।। भयउ न अहइ न अब होनिहारा। भूप भरत जस पिता तुम्हारा।। बिधि हरि हरु सुरपति दिसिनाथा। बरनहिं सब दसरथ गुन गाथा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 353 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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