🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 349

The Book of Ayodhyā · Entry 349 of 664 · type: चौपाई

पितु हित भरत कीन्हि जसि करनी। सो मुख लाख जाइ नहिं बरनी।। सुदिनु सोधि मुनिबर तब आए। सचिव महाजन सकल बोलाए।। बैठे राजसभाँ सब जाई। पठए बोलि भरत दोउ भाई।। भरतु बसिष्ठ निकट बैठारे। नीति धरममय बचन उचारे।। प्रथम कथा सब मुनिबर बरनी। कैकइ कुटिल कीन्हि जसि करनी।। भूप धरमब्रतु सत्य सराहा। जेहिं तनु परिहरि प्रेमु निबाहा।। कहत राम गुन सील सुभाऊ। सजल नयन पुलकेउ मुनिराऊ।। बहुरि लखन सिय प्रीति बखानी। सोक सनेह मगन मुनि ग्यानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 349 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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