🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 347

The Book of Ayodhyā · Entry 347 of 664 · type: चौपाई

नृपतनु बेद बिदित अन्हवावा। परम बिचित्र बिमानु बनावा।। गहि पद भरत मातु सब राखी। रहीं रानि दरसन अभिलाषी।। चंदन अगर भार बहु आए। अमित अनेक सुगंध सुहाए।। सरजु तीर रचि चिता बनाई। जनु सुरपुर सोपान सुहाई।। एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही। बिधिवत न्हाइ तिलांजुलि दीन्ही।। सोधि सुमृति सब बेद पुराना। कीन्ह भरत दसगात बिधाना।। जहँ जस मुनिबर आयसु दीन्हा। तहँ तस सहस भाँति सबु कीन्हा।। भए बिसुद्ध दिए सब दाना। धेनु बाजि गज बाहन नाना।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 347 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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