🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 345

The Book of Ayodhyā · Entry 345 of 664 · type: चौपाई

राम प्रानहु तें प्रान तुम्हारे। तुम्ह रघुपतिहि प्रानहु तें प्यारे।। बिधु बिष चवै स्त्रवै हिमु आगी। होइ बारिचर बारि बिरागी।। भएँ ग्यानु बरु मिटै न मोहू। तुम्ह रामहि प्रतिकूल न होहू।। मत तुम्हार यहु जो जग कहहीं। सो सपनेहुँ सुख सुगति न लहहीं।। अस कहि मातु भरतु हियँ लाए। थन पय स्त्रवहिं नयन जल छाए।। करत बिलाप बहुत यहि भाँती। बैठेहिं बीति गइ सब राती।। बामदेउ बसिष्ठ तब आए। सचिव महाजन सकल बोलाए।। मुनि बहु भाँति भरत उपदेसे। कहि परमारथ बचन सुदेसे।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 345 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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