🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 343

The Book of Ayodhyā · Entry 343 of 664 · type: चौपाई

बेचहिं बेदु धरमु दुहि लेहीं। पिसुन पराय पाप कहि देहीं।। कपटी कुटिल कलहप्रिय क्रोधी। बेद बिदूषक बिस्व बिरोधी।। लोभी लंपट लोलुपचारा। जे ताकहिं परधनु परदारा।। पावौं मैं तिन्ह के गति घोरा। जौं जननी यहु संमत मोरा।। जे नहिं साधुसंग अनुरागे। परमारथ पथ बिमुख अभागे।। जे न भजहिं हरि नरतनु पाई। जिन्हहि न हरि हर सुजसु सोहाई।। तजि श्रुतिपंथु बाम पथ चलहीं। बंचक बिरचि बेष जगु छलहीं।। तिन्ह कै गति मोहि संकर देऊ। जननी जौं यहु जानौं भेऊ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 343 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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