🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 341

The Book of Ayodhyā · Entry 341 of 664 · type: चौपाई

बिलपहिं बिकल भरत दोउ भाई। कौसल्याँ लिए हृदयँ लगाई।। भाँति अनेक भरतु समुझाए। कहि बिबेकमय बचन सुनाए।। भरतहुँ मातु सकल समुझाईं। कहि पुरान श्रुति कथा सुहाईं।। छल बिहीन सुचि सरल सुबानी। बोले भरत जोरि जुग पानी।। जे अघ मातु पिता सुत मारें। गाइ गोठ महिसुर पुर जारें।। जे अघ तिय बालक बध कीन्हें। मीत महीपति माहुर दीन्हें।। जे पातक उपपातक अहहीं। करम बचन मन भव कबि कहहीं।। ते पातक मोहि होहुँ बिधाता। जौं यहु होइ मोर मत माता।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 341 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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