🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 337

The Book of Ayodhyā · Entry 337 of 664 · type: चौपाई

सरल सुभाय मायँ हियँ लाए। अति हित मनहुँ राम फिरि आए।। भेंटेउ बहुरि लखन लघु भाई। सोकु सनेहु न हृदयँ समाई।। देखि सुभाउ कहत सबु कोई। राम मातु अस काहे न होई।। माताँ भरतु गोद बैठारे। आँसु पौंछि मृदु बचन उचारे।। अजहुँ बच्छ बलि धीरज धरहू। कुसमउ समुझि सोक परिहरहू।। जनि मानहु हियँ हानि गलानी। काल करम गति अघटित जानि।। काहुहि दोसु देहु जनि ताता। भा मोहि सब बिधि बाम बिधाता।। जो एतेहुँ दुख मोहि जिआवा। अजहुँ को जानइ का तेहि भावा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 337 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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