🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 335

The Book of Ayodhyā · Entry 335 of 664 · type: चौपाई

भरतहि देखि मातु उठि धाई। मुरुछित अवनि परी झइँ आई।। देखत भरतु बिकल भए भारी। परे चरन तन दसा बिसारी।। मातु तात कहँ देहि देखाई। कहँ सिय रामु लखनु दोउ भाई।। कैकइ कत जनमी जग माझा। जौं जनमि त भइ काहे न बाँझा।। कुल कलंकु जेहिं जनमेउ मोही। अपजस भाजन प्रियजन द्रोही।। को तिभुवन मोहि सरिस अभागी। गति असि तोरि मातु जेहि लागी।। पितु सुरपुर बन रघुबर केतू। मैं केवल सब अनरथ हेतु।। धिग मोहि भयउँ बेनु बन आगी। दुसह दाह दुख दूषन भागी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 335 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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