🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 333

The Book of Ayodhyā · Entry 333 of 664 · type: चौपाई

सुनि सत्रुघुन मातु कुटिलाई। जरहिं गात रिस कछु न बसाई।। तेहि अवसर कुबरी तहँ आई। बसन बिभूषन बिबिध बनाई।। लखि रिस भरेउ लखन लघु भाई। बरत अनल घृत आहुति पाई।। हुमगि लात तकि कूबर मारा। परि मुह भर महि करत पुकारा।। कूबर टूटेउ फूट कपारू। दलित दसन मुख रुधिर प्रचारू।। आह दइअ मैं काह नसावा। करत नीक फलु अनइस पावा।। सुनि रिपुहन लखि नख सिख खोटी। लगे घसीटन धरि धरि झोंटी।। भरत दयानिधि दीन्हि छड़ाई। कौसल्या पहिं गे दोउ भाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 333 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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