🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 327

The Book of Ayodhyā · Entry 327 of 664 · type: चौपाई

तात बात मैं सकल सँवारी। भै मंथरा सहाय बिचारी।। कछुक काज बिधि बीच बिगारेउ। भूपति सुरपति पुर पगु धारेउ।। सुनत भरतु भए बिबस बिषादा। जनु सहमेउ करि केहरि नादा।। तात तात हा तात पुकारी। परे भूमितल ब्याकुल भारी।। चलत न देखन पायउँ तोही। तात न रामहि सौंपेहु मोही।। बहुरि धीर धरि उठे सँभारी। कहु पितु मरन हेतु महतारी।। सुनि सुत बचन कहति कैकेई। मरमु पाँछि जनु माहुर देई।। आदिहु तें सब आपनि करनी। कुटिल कठोर मुदित मन बरनी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 327 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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