🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 98

The Book of the Aftermath · Entry 98 of 270 · type: चौपाई

जौं परलोक इहाँ सुख चहहू। सुनि मम बचन ह्रृदयँ दृढ़ गहहू।। सुलभ सुखद मारग यह भाई। भगति मोरि पुरान श्रुति गाई।। ग्यान अगम प्रत्यूह अनेका। साधन कठिन न मन कहुँ टेका।। करत कष्ट बहु पावइ कोऊ। भक्ति हीन मोहि प्रिय नहिं सोऊ।। भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी। बिनु सतसंग न पावहिं प्रानी।। पुन्य पुंज बिनु मिलहिं न संता। सतसंगति संसृति कर अंता।। पुन्य एक जग महुँ नहिं दूजा। मन क्रम बचन बिप्र पद पूजा।। सानुकूल तेहि पर मुनि देवा। जो तजि कपटु करइ द्विज सेवा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 98 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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