🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 96

The Book of the Aftermath · Entry 96 of 270 · type: चौपाई

एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई।। नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं। पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं।। ताहि कबहुँ भल कहइ न कोई। गुंजा ग्रहइ परस मनि खोई।। आकर चारि लच्छ चौरासी। जोनि भ्रमत यह जिव अबिनासी।। फिरत सदा माया कर प्रेरा। काल कर्म सुभाव गुन घेरा।। कबहुँक करि करुना नर देही। देत ईस बिनु हेतु सनेही।। नर तनु भव बारिधि कहुँ बेरो। सन्मुख मरुत अनुग्रह मेरो।। करनधार सदगुर दृढ़ नावा। दुर्लभ साज सुलभ करि पावा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 96 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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