🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 94

The Book of the Aftermath · Entry 94 of 270 · type: चौपाई

एक बार रघुनाथ बोलाए। गुर द्विज पुरबासी सब आए।। बैठे गुर मुनि अरु द्विज सज्जन। बोले बचन भगत भव भंजन।। सनहु सकल पुरजन मम बानी। कहउँ न कछु ममता उर आनी।। नहिं अनीति नहिं कछु प्रभुताई। सुनहु करहु जो तुम्हहि सोहाई।। सोइ सेवक प्रियतम मम सोई। मम अनुसासन मानै जोई।। जौं अनीति कछु भाषौं भाई। तौं मोहि बरजहु भय बिसराई।। बड़ें भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथिन्ह गावा।। साधन धाम मोच्छ कर द्वारा। पाइ न जेहिं परलोक सँवारा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 94 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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