🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 92

The Book of the Aftermath · Entry 92 of 270 · type: चौपाई

श्रीमुख बचन सुनत सब भाई। हरषे प्रेम न हृदयँ समाई।। करहिं बिनय अति बारहिं बारा। हनूमान हियँ हरष अपारा।। पुनि रघुपति निज मंदिर गए। एहि बिधि चरित करत नित नए।। बार बार नारद मुनि आवहिं। चरित पुनीत राम के गावहिं।। नित नव चरन देखि मुनि जाहीं। ब्रह्मलोक सब कथा कहाहीं।। सुनि बिरंचि अतिसय सुख मानहिं। पुनि पुनि तात करहु गुन गानहिं।। सनकादिक नारदहि सराहहिं। जद्यपि ब्रह्म निरत मुनि आहहिं।। सुनि गुन गान समाधि बिसारी।। सादर सुनहिं परम अधिकारी।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 92 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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