🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 88

The Book of the Aftermath · Entry 88 of 270 · type: चौपाई

लोभइ ओढ़न लोभइ डासन। सिस्त्रोदर पर जमपुर त्रास न।। काहू की जौं सुनहिं बड़ाई। स्वास लेहिं जनु जूड़ी आई।। जब काहू कै देखहिं बिपती। सुखी भए मानहुँ जग नृपती।। स्वारथ रत परिवार बिरोधी। लंपट काम लोभ अति क्रोधी।। मातु पिता गुर बिप्र न मानहिं। आपु गए अरु घालहिं आनहिं।। करहिं मोह बस द्रोह परावा। संत संग हरि कथा न भावा।। अवगुन सिंधु मंदमति कामी। बेद बिदूषक परधन स्वामी।। बिप्र द्रोह पर द्रोह बिसेषा। दंभ कपट जियँ धरें सुबेषा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 88 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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