🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 8

The Book of the Aftermath · Entry 8 of 270 · type: चौपाई

हरषि भरत कोसलपुर आए। समाचार सब गुरहि सुनाए।। पुनि मंदिर महँ बात जनाई। आवत नगर कुसल रघुराई।। सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।। समाचार पुरबासिन्ह पाए। नर अरु नारि हरषि सब धाए।। दधि दुर्बा रोचन फल फूला। नव तुलसी दल मंगल मूला।। भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधु सिंधुरगामिनी।। जे जैसेहिं तैसेहिं उटि धावहिं। बाल बृद्ध कहँ संग न लावहिं।। एक एकन्ह कहँ बूझहिं भाई। तुम्ह देखे दयाल रघुराई।। अवधपुरी प्रभु आवत जानी। भई सकल सोभा कै खानी।। बहइ सुहावन त्रिबिध समीरा। भइ सरजू अति निर्मल नीरा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 8 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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