🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 76

The Book of the Aftermath · Entry 76 of 270 · type: चौपाई

सुनि प्रभु बचन हरषि मुनि चारी। पुलकित तन अस्तुति अनुसारी।। जय भगवंत अनंत अनामय। अनघ अनेक एक करुनामय।। जय निर्गुन जय जय गुन सागर। सुख मंदिर सुंदर अति नागर।। जय इंदिरा रमन जय भूधर। अनुपम अज अनादि सोभाकर।। ग्यान निधान अमान मानप्रद। पावन सुजस पुरान बेद बद।। तग्य कृतग्य अग्यता भंजन। नाम अनेक अनाम निरंजन।। सर्ब सर्बगत सर्ब उरालय। बससि सदा हम कहुँ परिपालय।। द्वंद बिपति भव फंद बिभंजय। ह्रदि बसि राम काम मद गंजय।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 76 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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