🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 65

The Book of the Aftermath · Entry 65 of 270 · type: चौपाई

दूरि फराक रुचिर सो घाटा। जहँ जल पिअहिं बाजि गज ठाटा।। पनिघट परम मनोहर नाना। तहाँ न पुरुष करहिं अस्नाना।। राजघाट सब बिधि सुंदर बर। मज्जहिं तहाँ बरन चारिउ नर।। तीर तीर देवन्ह के मंदिर। चहुँ दिसि तिन्ह के उपबन सुंदर।। कहुँ कहुँ सरिता तीर उदासी। बसहिं ग्यान रत मुनि संन्यासी।। तीर तीर तुलसिका सुहाई। बृंद बृंद बहु मुनिन्ह लगाई।। पुर सोभा कछु बरनि न जाई। बाहेर नगर परम रुचिराई।। देखत पुरी अखिल अघ भागा। बन उपबन बापिका तड़ागा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 65 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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