🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 62

The Book of the Aftermath · Entry 62 of 270 · type: चौपाई

सुमन बाटिका सबहिं लगाई। बिबिध भाँति करि जतन बनाई।। लता ललित बहु जाति सुहाई। फूलहिं सदा बंसत कि नाई।। गुंजत मधुकर मुखर मनोहर। मारुत त्रिबिध सदा बह सुंदर।। नाना खग बालकन्हि जिआए। बोलत मधुर उड़ात सुहाए।। मोर हंस सारस पारावत। भवननि पर सोभा अति पावत।। जहँ तहँ देखहिं निज परिछाहीं। बहु बिधि कूजहिं नृत्य कराहीं।। सुक सारिका पढ़ावहिं बालक। कहहु राम रघुपति जनपालक।। राज दुआर सकल बिधि चारू। बीथीं चौहट रूचिर बजारू।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 62 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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