🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 57

The Book of the Aftermath · Entry 57 of 270 · type: चौपाई

प्रातकाल सरऊ करि मज्जन। बैठहिं सभाँ संग द्विज सज्जन।। बेद पुरान बसिष्ट बखानहिं। सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं।। अनुजन्ह संजुत भोजन करहीं। देखि सकल जननीं सुख भरहीं।। भरत सत्रुहन दोनउ भाई। सहित पवनसुत उपबन जाई।। बूझहिं बैठि राम गुन गाहा। कह हनुमान सुमति अवगाहा।। सुनत बिमल गुन अति सुख पावहिं। बहुरि बहुरि करि बिनय कहावहिं।। सब कें गृह गृह होहिं पुराना। रामचरित पावन बिधि नाना।। नर अरु नारि राम गुन गानहिं। करहिं दिवस निसि जात न जानहिं।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 57 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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