🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 47

The Book of the Aftermath · Entry 47 of 270 · type: चौपाई

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।। सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती।। चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुँ अघ नाहीं।। राम भगति रत नर अरु नारी। सकल परम गति के अधिकारी।। अल्पमृत्यु नहिं कवनिउ पीरा। सब सुंदर सब बिरुज सरीरा।। नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना।। सब निर्दंभ धर्मरत पुनी। नर अरु नारि चतुर सब गुनी।। सब गुनग्य पंडित सब ग्यानी। सब कृतग्य नहिं कपट सयानी।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 47 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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