🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 24

The Book of the Aftermath · Entry 24 of 270 · type: चौपाई

प्रभु जानी कैकेई लजानी। प्रथम तासु गृह गए भवानी।। ताहि प्रबोधि बहुत सुख दीन्हा। पुनि निज भवन गवन हरि कीन्हा।। कृपासिंधु जब मंदिर गए। पुर नर नारि सुखी सब भए।। गुर बसिष्ट द्विज लिए बुलाई। आजु सुघरी सुदिन समुदाई।। सब द्विज देहु हरषि अनुसासन। रामचंद्र बैठहिं सिंघासन।। मुनि बसिष्ट के बचन सुहाए। सुनत सकल बिप्रन्ह अति भाए।। कहहिं बचन मृदु बिप्र अनेका। जग अभिराम राम अभिषेका।। अब मुनिबर बिलंब नहिं कीजे। महाराज कहँ तिलक करीजै।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 24 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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