🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 22

The Book of the Aftermath · Entry 22 of 270 · type: चौपाई

कंचन कलस बिचित्र सँवारे। सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे।। बंदनवार पताका केतू। सबन्हि बनाए मंगल हेतू।। बीथीं सकल सुगंध सिंचाई। गजमनि रचि बहु चौक पुराई।। नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे।। जहँ तहँ नारि निछावर करहीं। देहिं असीस हरष उर भरहीं।। कंचन थार आरती नाना। जुबती सजें करहिं सुभ गाना।। करहिं आरती आरतिहर कें। रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें।। पुर सोभा संपति कल्याना। निगम सेष सारदा बखाना।। तेउ यह चरित देखि ठगि रहहीं। उमा तासु गुन नर किमि कहहीं।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 22 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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