🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 219

The Book of the Aftermath · Entry 219 of 270 · type: चौपाई

गयउँ उजेनी सुनु उरगारी। दीन मलीन दरिद्र दुखारी।। गएँ काल कछु संपति पाई। तहँ पुनि करउँ संभु सेवकाई।। बिप्र एक बैदिक सिव पूजा। करइ सदा तेहि काजु न दूजा।। परम साधु परमारथ बिंदक। संभु उपासक नहिं हरि निंदक।। तेहि सेवउँ मैं कपट समेता। द्विज दयाल अति नीति निकेता।। बाहिज नम्र देखि मोहि साईं। बिप्र पढ़ाव पुत्र की नाईं।। संभु मंत्र मोहि द्विजबर दीन्हा। सुभ उपदेस बिबिध बिधि कीन्हा।। जपउँ मंत्र सिव मंदिर जाई। हृदयँ दंभ अहमिति अधिकाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 219 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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