🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 215

The Book of the Aftermath · Entry 215 of 270 · type: चौपाई

कृतजुग सब जोगी बिग्यानी। करि हरि ध्यान तरहिं भव प्रानी।। त्रेताँ बिबिध जग्य नर करहीं। प्रभुहि समर्पि कर्म भव तरहीं।। द्वापर करि रघुपति पद पूजा। नर भव तरहिं उपाय न दूजा।। कलिजुग केवल हरि गुन गाहा। गावत नर पावहिं भव थाहा।। कलिजुग जोग न जग्य न ग्याना। एक अधार राम गुन गाना।। सब भरोस तजि जो भज रामहि। प्रेम समेत गाव गुन ग्रामहि।। सोइ भव तर कछु संसय नाहीं। नाम प्रताप प्रगट कलि माहीं।। कलि कर एक पुनीत प्रतापा। मानस पुन्य होहिं नहिं पापा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 215 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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