🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 20

The Book of the Aftermath · Entry 20 of 270 · type: चौपाई

लंकापति कपीस नल नीला। जामवंत अंगद सुभसीला।। हनुमदादि सब बानर बीरा। धरे मनोहर मनुज सरीरा।। भरत सनेह सील ब्रत नेमा। सादर सब बरनहिं अति प्रेमा।। देखि नगरबासिन्ह कै रीती। सकल सराहहि प्रभु पद प्रीती।। पुनि रघुपति सब सखा बोलाए। मुनि पद लागहु सकल सिखाए।। गुर बसिष्ट कुलपूज्य हमारे। इन्ह की कृपाँ दनुज रन मारे।। ए सब सखा सुनहु मुनि मेरे। भए समर सागर कहँ बेरे।। मम हित लागि जन्म इन्ह हारे। भरतहु ते मोहि अधिक पिआरे।। सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। निमिष निमिष उपजत सुख नए।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 20 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷