🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 188

The Book of the Aftermath · Entry 188 of 270 · type: चौपाई

बिनु संतोष न काम नसाहीं। काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं।। राम भजन बिनु मिटहिं कि कामा। थल बिहीन तरु कबहुँ कि जामा।। बिनु बिग्यान कि समता आवइ। कोउ अवकास कि नभ बिनु पावइ।। श्रद्धा बिना धर्म नहिं होई। बिनु महि गंध कि पावइ कोई।। बिनु तप तेज कि कर बिस्तारा। जल बिनु रस कि होइ संसारा।। सील कि मिल बिनु बुध सेवकाई। जिमि बिनु तेज न रूप गोसाई।। निज सुख बिनु मन होइ कि थीरा। परस कि होइ बिहीन समीरा।। कवनिउ सिद्धि कि बिनु बिस्वासा। बिनु हरि भजन न भव भय नासा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 188 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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