🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 150

The Book of the Aftermath · Entry 150 of 270 · type: चौपाई

गुन कृत सन्यपात नहिं केही। कोउ न मान मद तजेउ निबेही।। जोबन ज्वर केहि नहिं बलकावा। ममता केहि कर जस न नसावा।। मच्छर काहि कलंक न लावा। काहि न सोक समीर डोलावा।। चिंता साँपिनि को नहिं खाया। को जग जाहि न ब्यापी माया।। कीट मनोरथ दारु सरीरा। जेहि न लाग घुन को अस धीरा।। सुत बित लोक ईषना तीनी। केहि के मति इन्ह कृत न मलीनी।। यह सब माया कर परिवारा। प्रबल अमिति को बरनै पारा।। सिव चतुरानन जाहि डेराहीं। अपर जीव केहि लेखे माहीं।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 150 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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