🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 15

The Book of the Aftermath · Entry 15 of 270 · type: चौपाई

भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।। सीता चरन भरत सिरु नावा। अनुज समेत परम सुख पावा।। प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी। जनित बियोग बिपति सब नासी।। प्रेमातुर सब लोग निहारी। कौतुक कीन्ह कृपाल खरारी।। अमित रूप प्रगटे तेहि काला। जथाजोग मिले सबहि कृपाला।। कृपादृष्टि रघुबीर बिलोकी। किए सकल नर नारि बिसोकी।। छन महिं सबहि मिले भगवाना। उमा मरम यह काहुँ न जाना।। एहि बिधि सबहि सुखी करि रामा। आगें चले सील गुन धामा।। कौसल्यादि मातु सब धाई। निरखि बच्छ जनु धेनु लवाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 15 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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