🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 126

The Book of the Aftermath · Entry 126 of 270 · type: चौपाई

नाना भाँति मनहि समुझावा। प्रगट न ग्यान हृदयँ भ्रम छावा।। खेद खिन्न मन तर्क बढ़ाई। भयउ मोहबस तुम्हरिहिं नाई।। ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं। कहेसि जो संसय निज मन माहीं।। सुनि नारदहि लागि अति दाया। सुनु खग प्रबल राम कै माया।। जो ग्यानिन्ह कर चित अपहरई। बरिआई बिमोह मन करई।। जेहिं बहु बार नचावा मोही। सोइ ब्यापी बिहंगपति तोही।। महामोह उपजा उर तोरें। मिटिहि न बेगि कहें खग मोरें।। चतुरानन पहिं जाहु खगेसा। सोइ करेहु जेहि होइ निदेसा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 126 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷