🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 114

The Book of the Aftermath · Entry 114 of 270 · type: चौपाई

राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं।। जीवनमुक्त महामुनि जेऊ। हरि गुन सुनहीं निरंतर तेऊ।। भव सागर चह पार जो पावा। राम कथा ता कहँ दृढ़ नावा।। बिषइन्ह कहँ पुनि हरि गुन ग्रामा। श्रवन सुखद अरु मन अभिरामा।। श्रवनवंत अस को जग माहीं। जाहि न रघुपति चरित सोहाहीं।। ते जड़ जीव निजात्मक घाती। जिन्हहि न रघुपति कथा सोहाती।। हरिचरित्र मानस तुम्ह गावा। सुनि मैं नाथ अमिति सुख पावा।। तुम्ह जो कही यह कथा सुहाई। कागभसुंडि गरुड़ प्रति गाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 114 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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