🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 104

The Book of the Aftermath · Entry 104 of 270 · type: चौपाई

एक बार बसिष्ट मुनि आए। जहाँ राम सुखधाम सुहाए।। अति आदर रघुनायक कीन्हा। पद पखारि पादोदक लीन्हा।। राम सुनहु मुनि कह कर जोरी। कृपासिंधु बिनती कछु मोरी।। देखि देखि आचरन तुम्हारा। होत मोह मम हृदयँ अपारा।। महिमा अमित बेद नहिं जाना। मैं केहि भाँति कहउँ भगवाना।। उपरोहित्य कर्म अति मंदा। बेद पुरान सुमृति कर निंदा।। जब न लेउँ मैं तब बिधि मोही। कहा लाभ आगें सुत तोही।। परमातमा ब्रह्म नर रूपा। होइहि रघुकुल भूषन भूपा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 104 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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