🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 100

The Book of the Aftermath · Entry 100 of 270 · type: चौपाई

कहहु भगति पथ कवन प्रयासा। जोग न मख जप तप उपवासा।। सरल सुभाव न मन कुटिलाई। जथा लाभ संतोष सदाई।। मोर दास कहाइ नर आसा। करइ तौ कहहु कहा बिस्वासा।। बहुत कहउँ का कथा बढ़ाई। एहि आचरन बस्य मैं भाई।। बैर न बिग्रह आस न त्रासा। सुखमय ताहि सदा सब आसा।। अनारंभ अनिकेत अमानी। अनघ अरोष दच्छ बिग्यानी।। प्रीति सदा सज्जन संसर्गा। तृन सम बिषय स्वर्ग अपबर्गा।। भगति पच्छ हठ नहिं सठताई। दुष्ट तर्क सब दूरि बहाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 100 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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